लखनऊ, अगस्त 10 -- पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण प्रस्ताव निरस्त करवाने के लिए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सभी सांसदों-विधायकों को पत्र लिखा है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि निजीकरण की पूरी प्रक्रिया अपारदर्शी है और संदेह के घेरे में है। समिति ने कहा है कि सोमवार से विधानमंडल सत्र शुरू हो रहा है और इस दौरान सभी विधायक निजीकरण के लिए तैयार दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग करें। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि पत्र में सांसदों-विधायकों को आंकड़ों के साथ बताया गया है कि दोनों वितरण निगम घाटे में नहीं हैं। पावर कॉरपोरेशन झूठे आंकड़ों से दोनों वितरण निगमों को घाटे में बताकर उन्हें बेचना चाहता है। पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन सब्सिडी और सरकारी विभागों के बिजली राजस्व बकाये को घाटे में दिखा रहा ह...
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