देहरादून, दिसम्बर 18 -- देहरादून। आधार आधारित बायोमैट्रिक्स उपस्थिति व्यवस्था केवल उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जिससे फार्मेसी शिक्षा में जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित होगा। ये सभी संस्थानों में लागू होनी चाहिए। ये बात गुरुवार को श्री देव भूमि इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी में आयोजित कार्यशाला में इंडियन फार्मेसी काउंसिल के उपाध्यक्ष जस्सुभाई हीराभाई चौधरी ने कही। काउंसिल के सदस्य डॉ. विभु साहनी ने कहा कि सभी संस्थानों को आधार आधारित जैव उपस्थिति व्यवस्था को शीघ्र लागू करना चाहिए, ताकि फार्मेसी शिक्षा में पारदर्शिता बनी रहे और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हो। वहीं डॉ. शिवानंद पाटिल ने इसे अनुशासित कार्यसंस्कृति और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने वाला प्रभ...