समस्तीपुर, दिसम्बर 9 -- मिनी बसों की शहर में संख्या घटने से सबसे ज्यादा नुकसान आमलोगों, छात्र-छात्राओं, कामकाजी महिलाओं आदि की होती हैं। इन्हें ऑटो या अन्य साधनों पर दोगुना किराया तक खर्च करना पड़ता है। बसों में सफर काफी सस्ता होती है। दूसरी ओर, बस मालिकों का कहना है कि पहले बस ड्राइवर के लिए वेतन निर्धारित था। साल में बोनस भी दिया जाता था, लेकिन स्थिति ऐसी बदली कि सारी व्यवस्था बदहाल हो गई। अब बस ड्राइवर अपना पैसा और पेट्रोल खर्च आदि निकालकर उन्हें पैसे देते हैं। एक तरह से कहा जाए कि अब बस ड्राइवर ही बस मालिकों को चला रहे हैं, तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। शहर का एकलौता बस स्टैंड कर्पूरी बस पड़ाव में एक दशक पूर्व बसों की संख्या 250 थी। जो अब धीरे धीरे 50 से 60 तक सीमट कर रह गई है। बस संचालकों ने बताया कि शुरुआत में ग्रामीण क्षेत्रों ...