मथुरा, नवम्बर 17 -- तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य महाराज की उपस्थिति में 10 दिवसीय यात्रा का विराम हुआ। उन्होंने बागेश्वर महाराज को अपने हृदय से लगाया। दृश्य ऐसा था जैसे एक अबोध बालक को मां अपनी गोद में लेकर उस पर स्नेह लुटाती हो। सभा की अध्यक्षता कर रहे रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि यह हिंदू एकता महाकुंभ का आयोजन हुआ है। यात्रा ने सबका दंभ तोड़ दिया। पदयात्रा का विश्राम हुआ है लेकिन सबके भीतर यात्रा का उद्देश्य जीवित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू सो रहा है इसीलिए विधर्मियों के अत्याचार हो रहे हैं। अब ओम शांति नहीं ओम क्रांति कहना सीखें। महाराज ने कहा कि सभी संत अपने मत मतांतर भुलाकर एक हों, उपासना अपनी करते रहें लेकिन भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए एक हो जाएं। रामभद्राचार्य ने कहा कि मेरा चेला शेर है, सियार नहीं। प्रत्य...