मोतिहारी, अगस्त 31 -- मोतिहारी, नसं। सदर अस्पताल में चर्म रोग, मानसिक रोग, डाइटीशियन से लेकर मधुमेह रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण जेनरल फिजिशियन एमबीबीएस डॉक्टर ओपीडी में आने वाले ऐसे मरीजों का इलाज करते हैं। हद तब हो जाती है जब विशेषज्ञ डॉक्टर के किसी कैंप या किसी वीआईपी के कार्यक्रम में ड्यूटी लगा दी जाती है तो आयुष डॉक्टरों की ड्यूटी लगा एलोपैथिक इलाज और दवा लिखने के लिए लगा दिया जाता है। इस ड्यूटी में सबसे अधिक होम्योपैथिक, यूनानी डॉक्टरों को परेशानी होती है कि देखे गए मरीज को कौन सी दवा लिखें। एलोपैथिक की जानकारी नहीं है और आयुष की दवा सदर अस्पताल में नहीं है। बस ऐसे समय में ये डॉक्टर बीमारी के बारे में सुनी और जांच लिख कर मरीज को अगले दिन आने को बोल देते हैं। ऐसी स्थिति महीने में दस रोज बनी रहती है। बताते हैं कि ऐसी ही स्थिति हड्डी...