देवघर, जनवरी 24 -- देवघर। सरकार एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं अस्पतालों में लगे आधुनिक उपकरण सपोर्ट स्टाफ के अभाव में धूल फांक रहे हैं। सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक यही तस्वीर सामने आ रही है। इलाज और जांच की सुविधा बढ़ाने के नाम पर लगाई गई मशीनें आज मरीजों के किसी काम की नहीं रह गई हैं। जमीनी हकीकत यह है कि मशीनें तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाले प्रशिक्षित ऑपरेटर, तकनीशियन और सपोर्ट स्टाफ नहीं हैं। नतीजा यह कि मरीजों को सरकारी अस्पतालों से राहत मिलने के बजाय निजी जांच केंद्रों और क्लिनिकों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां उन्हें अपनी जेब से हजारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। पिछले कुछ वर्षों में सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करन...