मोतिहारी, फरवरी 15 -- शहर के सत्याग्रह पार्क का अस्तित्व संकट में है। इसकी सौंदर्य मिटती जा रही है। इस कारण लोग पार्क में कम आ रहे है। वर्ष 2015 में पार्क का शुभारंभ हुआ तो शहर के लोगों को एक अच्छी जगह मिली, जहां लोग बिना शोरगुल सुबह-शाम समय बिताते थे। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक पार्क की ताजी हवा का आनंद लेते थे। छुट्टियों के दिनों में यहां काफी भीड़ होती थी। पार्क में दस रुपये का टिकट लगता है, लेकिन व्यवस्थाएं बदहाल हैं। पार्क की चहारदीवारी के बाहर जुआरियों का अड्डा लगता है। जार्ज ऑरवेल की जन्मस्थली के परिसर में भी जुआरियों का जमावड़ा लगता है। पार्क में टहलने वाले लोगों के सामान पलक झपकते लेकर भाग जाते हैं। टहलने आनेवाले लोग हमेशा भयभीत रहते हैं। लोगों का कहना है कि सुरक्षा की मुक्कमल व्यवस्था नहीं होने से असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ा रहत...