नई दिल्ली, अक्टूबर 20 -- वर्ष की सबसे काली रात अमावस्या पर दीपोत्सव मनाया जाता है। अमावस्या का अर्थ है अज्ञान। यह पूरे वर्ष की वह घोर निराशा और जड़ता है, जिसे हम जीवन की भागदौड़ में बटोर लेते हैं। दीपावली का दिव्य संदेश है- जहां अज्ञान है, वहां दुख है, डर है, चिंता है और सबसे बड़ी पीड़ा है- जन्म-मरण का चक्र, लेकिन जहां ज्ञान का दीपक जलता है, वहां 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म' का बोध होता है। सब कुछ ब्रह्म है, उसके अलावा और कुछ भी नहीं। यदि सच्ची समझ का दीया जल जाए, तो हमारे लिए रोज दीपावली है। ज्ञान का दीपक नहीं जला, तो आप बाहर करोड़ों दीये जला लें, भीतर अंधकार ही रहेगा। महादेव के त्रिशूल से ब्रह्मा के अहंकार वाले पांचवें सिर का कट जाना इस बात का प्रतीक है कि आत्मज्ञान के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा हमारा अहंकार है। वह भाव, जिससे हमने माया को जानने...