बलिया, जनवरी 7 -- लालगंज, हिन्दुस्तान संवाद। वृंदावन धाम से पधारे स्वामी चतुर्भुजाचार्य महाराज ने श्रीकृष्ण रूक्मिणी विवाह प्रसंग के वर्णन में बताया कि रुक्मिणी विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री थी और वह मन, वचन व कर्म से श्रीकृष्ण को ही अपना पति स्वीकार कर ली थी। लेकिन उसका भाई रुक्मी जबरदस्ती उसका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। यह खबर लगते ही रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर अपनी रक्षा की प्रार्थना की, तो भक्त की पुकार सुन बिना देर किए श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर विधिपूर्वक उनसे विवाह किया। यह प्रसंग सच्ची भक्ति, अटूट विश्वास और धर्म की सदैव विजय होने तथा भगवान द्वारा भक्तों की लाज रखने का संदेश देता है। मुरलीछपरा ब्लॉक क्षेत्र के रामानुज आश्रम शिवपुर कपूर दीयर (सेमरिया) में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सह लक्ष्मी नारायण महायज्ञ...