देहरादून, फरवरी 14 -- देश के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् स्व. सुंदरलाल बहुगुणा की पत्नी और हमेशा उनकी छाया बनकर साथ चली विमला बहुगुणा के निधन के बाद उनके काम हमेशा स्मृतियों में रहेंगे। पर्यावरण संरक्षण के लिए पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलीं विमला को उत्तराखंड में मंदिरों में अनुसूचित जाति के लोगों को प्रवेश दिलाने दिलाने के लिए भी हमेशा याद किया जाएगा। विमला बहुगुणा ने चारों धाम के मंदिर में अनुसूचित जाति के समाज को प्रवेश दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया था। उन्होंने भिलंगना में बाल गंगा और धर्म गंगा घाटी को अपना प्रमुख कार्य क्षेत्र बनाया था। जहां के अछूत वर्ग को बूढ़ाकेदारनाथ के मंदिर में भी प्रवेश कराया। इस दौरान विमला को लोगों के तानों के साथ मारपीट तक सहन करनी पड़ी थी। इसके बावजूद भी मंदिर में अनुसूचित जाति के लोगों का जब तक प्रवेश नही...
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