मेरठ, जून 19 -- संस्कृत ज्ञान-विज्ञान के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है। संस्कृत से ही हम भारतीय ज्ञान-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और संस्कार को सही ढंग से पहचान सकते हैं। ऐसे में संस्कृत को जानना, सीखना और समझना जरूरी है। बालेराम ब्रजभूषण विद्यामंदिर में संस्कृत भारती पश्चिमी उप्र और उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में जारी आवासीय प्रशिक्षण वर्ग एवं योग शिविर में यह बातें संस्कृत भारती के अखिल भारतीय प्रशिक्षण प्रमुख श्रीराम ने कही। अखिल भारतीय संघटन मंत्री जयप्रकाश गौतम ने कहा कि संस्कृत रहेगी तो विश्व में संस्कृति, संस्कार, समरसता, विश्वबन्धुत्व एवं वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना रहेगी। पश्चिमी उप्रदेश क्षेत्र के संघटन मंत्री देवेन्द्र पण्ड्या ने कहा कि हम अपने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक रीति-रिवाजों को भूलते जा रहे है। ऐसे...
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