नैनीताल, जनवरी 15 -- उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों में स्वीकृत पद रिक्त होने के बावजूद नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं करने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि स्वीकृत और रिक्त पदों पर ठेके या आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्तियां करना, न केवल युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी है। कोर्ट ने इसे राज्य की बड़ी निष्क्रियता माना है। न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने बीते दिनों एक मामले की सुनवाई के दौरान इसका संज्ञान लिया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका का दायरा बढ़ा दिया है। पीठ ने कहा कि एक ओर युवा सरकारी नौकरियों के इंतजार में 'ओवरएज' हो रहे हैं, वहीं सरकार नियमित पदों को भरने के बजाय आउटसोर्स-अस्थायी माध्...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.