बलरामपुर, जनवरी 16 -- बलरामपुर,संवाददाता। अब गोशालाओं में संरक्षित गोवंश पंचायतों के आए का जरिया बनेंगी। गोवंशों के गोबर का प्रयोग न केवल खेतों में खाद बल्कि आर्गेनिक गमला व गो काष्ठ बनाने में किया जाएगा। पहले चरण में आठ वृहद गोशालाओं को चिन्हित किया गया है। इन गोशालाओं में पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद तैयार करने के लिए लाखों की लागत से मशीनें लगाई जाएंगी। जिसकी देखरेख संग उत्पाद तैयार करने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं से करार किया जाएगा। जिसके आधार पर संबंधित संस्थाएं वार्षिक शुल्क गोशाला को देंगी। जिसके बदले गोबर लेकर वह उत्पाद तैयार करेंगी। इस दिशा में पशुपालन विभाग ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली है।
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