भभुआ, मार्च 27 -- जंगल व पहाड़ पर बसे अधौरा प्रखंड के गांवों के पशुपालकों के लिए परेशानी लेकर आता है गर्मी का यह मौसम नदियों के तट पर तीन माह तक यायावर की जिंदगी काटते हैं वनवासी बाजार में दूध-दही बेच खुद और परिवार के खर्च का करते हैं इंतजाम इंट्रो तपिश में संभावित चारा-पानी संकट को देख पहाड़ व जंगल क्षेत्र के पशुपालक घर-परिवार छोड़ अपने मवेशियों के साथ मैदानी भाग की ओर निकलने लगे हैं। वह तीन माह तक यायावर की तरह समय काटेंगे। हर वर्ष गर्मी के मौसम में अधौरा, चैनपुर व भगवानपुर के पशुपालकों को यह परेशानी झेलनी पड़ती है। गर्मी बढ़ने के साथ नदी-नाले सूख जाते हैं। कुएं का पानी नीचे चला जाता है। चापाकल भी पानी उगलना बंद कर देते हैं। घरों में लगे समरसेबुल से भी कम पानी मिलता है। पशुपालक अपने परिवार के साथ होली मनाने के बाद अपने मवेशियों के साथ मैदानी...
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