नई दिल्ली, फरवरी 5 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने फर्श, बर्तन और कंटेनर धोने से निकलने वाले गंदे पानी को बिना साफ किए सीवर में छोड़ने के मामले में एक मिठाई दुकान के मालिक को राहत नहीं दी है। सत्र अदालत ने इस मामले में दुकानदार को दोषी ठहराया था। अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि छोटे प्रतिष्ठानों को केवल उनके आकार या संचालन के पैमाने के आधार पर पर्यावरणीय नियमों से छूट नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि छोटी खाने-पीने की दुकानें, रेस्तरां और फूड प्रोसेसिंग यूनिट बिना ट्रीटमेंट वाला गंदा पानी सार्वजनिक सीवर और नालियों में छोड़कर प्रदूषण में बड़ा योगदान देती हैं। यह मामला वर्ष 2000 का है। हालांकि, याचिकाकर्ता की उम्र को देखते हुए उच्च न्यायालय...