नई दिल्ली, नवम्बर 30 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। राजधानी के एक संरक्षित तालाब पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से हाईवे निर्माण को लेकर विवाद और तेज हो गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर साफ कर दिया है कि आद्रभूमि नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई न होने की बात गलत है। मंत्रालय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (ईपीए) 1986 के तहत ऐसे मामलों में पहली बार दस लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जबकि दोबारा उल्लंघन पर दस साल तक की सजा या जुर्माना दोनों का प्रावधान है। यह दंड कंपनियों व सरकारी विभागों पर भी समान रूप से लागू होगा। मंत्रालय ने हलफनामे में कहा कि ईपीए एक व्यापक कानून है, जो आद्रभूमियों सहित पूरे पर्यावरण की सुरक्षा सु...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.