नई दिल्ली, नवम्बर 8 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि ट्रांजिट जमानत एक सीमित अवधि के लिए दी जाने वाली अस्थायी राहत है, जिसका प्रभाव उस समय समाप्त हो जाता है जब सक्षम अदालत के अधिकार क्षेत्र में मामला आ जाता है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल आरोपी को तुरंत गिरफ्तारी से बचाने के लिए होती है, न कि उसे स्थायी सुरक्षा प्रदान करने या आरोपों के गुण-दोष पर निर्णय देने के लिए। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा की एकल पीठ ने कहा कि जब व्यक्ति इस अवसर का लाभ उठाकर सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश हो जाता है तो ट्रांजिट जमानत का प्रभाव समाप्त हो जाता है। इस सुरक्षा को उसके सीमित उद्देश्य से आगे बढ़ाना न केवल ट्रांजिट जमानत की अवधारणा को कमजोर करेगा, बल्कि उस अदालत के अधिकार क्षेत्र में दखल देगा जो मामले का निपटारा ...