नई दिल्ली, दिसम्बर 4 -- नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता। नई फर्म के लिए जीएसटी पंजीकरण लेना भले ही आसान हो गया है, लेकिन फर्म बंद करते समय इस पंजीकरण को सरेंडर करने में दिल्ली के व्यापारियों को पसीना बहाना पड़ रहा है। जीएसटी पंजीकरण सरेंडर करने के आवेदन के बाद छह-छह महीने तक उन्हें विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दिल्ली के व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी अधिकारियों का ध्यान नए पंजीकरण पर केंद्रित है। दिल्ली में तकरीबन आठ लाख से ज्यादा फर्म जीएसटी में पंजीकृत हो चुके हैं। नई फर्म को पंजीकृत करने पर जीएसटी विभाग के राजस्व में बढ़ोतरी होती है, लेकिन पंजीकरण निरस्त कराए जाने पर विभाग को कोई फायदा नहीं है। इसकी वजह से पंजीकरण सरेंडर करने की फाइलों का निबटारा करना विभाग की प्राथमिकता में नहीं। --- केस-1 चांदनी चौक के रेडिमेड गारमें...