आदित्यपुर, दिसम्बर 11 -- चांडिल, संवाददाता। संथाल की संस्कृति स्वाभाविक रूप से वॉरियर (योद्धा) की रही है। संथाल का इतिहास संस्कृति का एक अभिन्न अंग है जो उनकी प्रकृति से जुड़ाव, बहादुरी, संस्कृति और समृद्धि को बखूबी दर्शाता है। यह बातें पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने ईचागढ़ में मीडिया से बातचीत में कही। सुबोधकांत सहाय बुधवार को ईचागढ़ के टीकर स्थित परगना चौक में पातकोम दिशोम के पूर्व देश परगना नकुल बेसरा की 73वीं जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया। इस अवसर पर खेलकूद, फुटबॉल मैच एवं संस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। मौके पर देश परगना रामेश्वर बेसरा, झामुमो केंद्रीय सदस्य चारुचांद किस्कू, कांग्रेस ईचागढ़ विस प्रभारी तरुण डे, सोमचांद माडी॔, श्यामल माडी॔, प्रमुख गुरुपद माडी॔, डॉ. भूषण मुर्मू, मुरतेज आदि मौजू...
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