हरिद्वार, मई 12 -- जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि संत का प्रथम लक्षण ही समाज की चिंता करना है। उन्होंने कहा कि अगर संत समाज की चिंता कर रहे हैं तो यह स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि संत और सामान्य में यही अंतर है। संन्यास अर्थ ही त्याग है। जम्मू कश्मीर को लेकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने जो चिंता व्यक्त की है, इसमें सभी संत बलिदान के लिए तैयार हैं। इतिहास भी इसका साक्षी है कि जब भी राष्ट्र को आवश्यकता पड़ी तो संत समाज ने सीमा की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया है। यह बातें उन्होंने स्थापना दिवस में कही। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज के संयोजन में सोमवार को आश्रम का स्थापना दिवस मनाया गया। इसमें संत, महंत और आचार्य महामंडलेश्वर के अलावा कई अखाड़ों के महामंडलेश्वर जुटे। सभी ने विहिप के नेता दिने...
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