हनुमान प्रसाद पोद्दार, अक्टूबर 14 -- संत साधना का आश्रय लेना परम आवश्यक है। इस साधना का अभ्यास करने से ज्यों-ज्यों हमारे अंदर गुणों का विकास होगा, त्यों-त्यों हम संत और संत कृपा के अधिकारी होंगे। अधिकांश सच्चे संत प्रायः अपने को लोगों में प्रकट नहीं करके जगत में विचरण करते हैं। संत-परंपरा के प्रसिद्ध संत आज भी हैं। वे हम लोगों के बीच में आते भी हैं; पर हम उन्हें पहचान नहीं पाते। भिन्न-भिन्न स्तरों पर भगवान का कार्य करने वाले ऐसे हजारों संत पृथ्वी पर हैं, जो लोकचक्षु से परे रहकर अपना महत कार्य कर रहे हैं। कहते हैं कि संत जगत में सब कार्य नियमपूर्वक होते हैं। संतों के सर्वोपरि संचालक परम सद्गुरु भगवान शंकर हैं, जो रुद्ररूप में जगत का संहार और सुंदर शिवरूप में सबका सदा कल्याण करते हैं। उनकी अधीनता में अनेक सिद्ध-महात्मा संत पुरुष निरंतर ईश्व...