लखनऊ, अगस्त 13 -- लखनऊ, संवाददाता। संतान की लंबी आयु और स्वास्थ जीवन की कामना के साथ गुरुवार को महिलाएं हरछठ (हलषष्ठी) का व्रत रखेंगी। इस दिन महिलाएं खेतों में उगे या हल से जोता गया कोई अनाज या सब्जी नहीं खाती हैं। पूजन और कथा के बाद व्रती महिलाएं केवल तालाब में पैदा हुए तिन्नी के चावल, केर्मुआ का साग, पसही के चावल का सेवन करती हैं। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि हरछठ (हलषष्ठी) व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भगवान कृष्ण के बड़े भाई श्री बलराम जी के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है। बलराम जी का शस्त्र हल और मूसल है। इस लिए इस दिन हल पूजन का विशेष महत्व है। इसे हल छठ, पिन्नी छठ या खमर छठ भी कहते हैं। माताएं हलषष्ठी का व्रत संतान की लंबी आयु की प्राप्ति के लिए रखती हैं। घर की दीवार पर गेरू से ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.