कटिहार, दिसम्बर 8 -- समेली,एक संवाददाता संतमत सत्संग मंदिर खैरा में शिवानंद जी महाराज के सत्संग में श्रद्धालु प्रवचन सुनने उमड़े। सत्संग में गुरु महाराज की संत स्तुति विनती,एवं गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की रामचरित मानस का पाठ किया गया एवं अनेक वक्ताओं के द्वारा प्रवचन गुरु अमृत वाणी की रसपान किया । अररिया के स्वामी शिवानंद जी महाराज ने कहा ,कि कर्मों की गति न्यारी है ,मन, वचन और कर्म-इन तीनों से मनुष्य निरंतर कुछ-न-कुछ कर्म करता ही रहता है। श्वास लेना भी एक कर्म है, पर वह स्वाभाविक कर्म है; जबकि जो कर्म हम जान-बूझकर करते हैं, वे अस्वाभाविक कर्म कहलाते हैं।कर्म दो प्रकार के होते हैं-पाप और पुण्य।मन यदि शुभ कार्यों के चिंतन में लगे तो पुण्य कर्म होता है। सत्संग में भंडारा का आयोजन भी था सत्संग में उपस्थित पूज्य स्वामी वासुदेव बाबा , चंद्र...