प्रयागराज, फरवरी 1 -- संगम की रेती पर एक माह तक नियम, संयम के साथ जप-तप साधना करने के बाद रविवार को लाखों कल्पवासियों ने त्रिवेणी व पूर्वजों को नमन कर घर को प्रस्थान किया। जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति, मोक्ष के प्राप्ति की संकल्पना के साथ कल्पवासी सालभर की अलौकिक शक्ति बटोर कर विदा लिए। शिविर की ड्योढ़ी पर पौष पूर्णिमा पर बोया गया जौ लहराता हुआ अन्न-धन का आशीष बरसाता रहा। माघ मेला के पांचवें स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर ब्रह्ममुहुर्त में कल्पवासियों ने स्नान किया। तीर्थ पुरोहितों के सानिध्य में यथाशक्ति अन्न, वस्त्र, द्रव्य आदि दान कर कल्पवास संकल्प की पूर्णाहुति की। शिविर में कल्पवासियों ने विधिविधान से भगवान सत्य नारायण की कथा सुनी और ब्राह्मणों को भोजन कराया। जिन कल्पवासियों का संकल्प पूर्ण हो गया था उन्होंने शय्या दान की परम्परा को...
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