वाराणसी, दिसम्बर 4 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी में गुरुवार की शाम गंगा तट पर केरल और तमिलनाडु की विराट नृत्य संस्कृति के दर्शन हुए। आठ सौ वर्ष से भी अधिक प्राचीन कोयलियाट्टम के माध्यम से केरल में मां काली की लोक आराधना की पद्धतियों से काशीवासियों का परिचय कलाकारों ने कराया। वहीं मयिलाट्टम की प्रस्तुति में भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) के प्रति अगाध भक्ति का प्रदर्शन किया। ये पारंपरिक लोकनृत्य काशी तमिल संगमम 4.0 की तीसरी सांस्कृतिक संध्या में चेन्नई की भानुमति और उनके दल के कलाकारों ने प्रस्तुत किए। कोयलियाट्टम, मयिलाट्टम, कालीयाट्टम आदि की प्रस्तुति की गई। दूसरे चक्र में इसी दल के कलाकारों ने डम्मी हॉर्स, माडू मायिलाट्टम की नृत्य प्रस्तुति की। मयिलाट्टम में मोर के पंख से सजे वस्त्र धारण कर कलाकार भगवान सुब्रह्मण्यम (मुरुगन) की वेशभूषा म...