वाराणसी, दिसम्बर 11 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। दक्षिण भारत में एक खास दिन नदी-तालाब में नहाकर 'गंगा-स्नानम् आच्चा' (गंगा स्नान किया) पूछने की लौकिक परंपरा अब भी प्रचलन में है। मां गंगा की सर्वभारतीय स्वीकार्यता को बल देने वाली यह परंपरा कार्तिक कृष्णपक्ष में निभाई जाती है। निशाव्यापिनी चतुर्दशी तिथि पर चंद्रोदय के बाद से सूर्योदय के पहले तक लोग निवास से आसपास के तालाबों, नदियों में स्नान करते हैं। स्नान से पहले और बाद में एक-दूसरे से पूछते हैं 'गंगा-स्नानम् आच्चा'? उनका मानना है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व सरसों का उबटन लगाकर किसी भी जलधारा में स्नान करने से काशी में गंगा स्नान के पुण्य की प्राप्ति होती है। घर के सभी सदस्य इसी विधि से स्नान कर, शुद्ध होकर नए वस्त्र धारण करते हैं। यह परंपरा निभाने के अगले दिन अमावस्या तिथि पर दीपावली का ...