वाराणसी, दिसम्बर 11 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी तमिल संगमम् 4.0 में नमो घाट पर चल रही प्रदर्शनी में 'थंजावुर थलैयाट्टी बोम्मई' हस्तशिल्प आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हिलने-डुलने वाली गुड़िया में दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्शन हो रहे हैं। अपनी कला के साथ पहली बार थंजावुर से काशी आए हरि प्रसंथ बूपाथी यहां के शिल्पप्रेमियों से मिल रहे प्यार से अभिभूत हैं। प्रदर्शनी में स्टॉल संख्या-28 पर प्रदर्शित थलैयाट्टी बोम्मई (हिलने-डुलने वाली गुड़िया) पारंपरिक शिल्प उनके परिवार की छठी पीढ़ी द्वारा संरक्षित की जा रही है। उनके विशेष प्रयत्नों से यह कला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है। हरि प्रसंथ बूपाथी इन गुड़ियों का अमेरिका, कनाडा सहित कई देशों में निर्यात करते हैं। ये थंजावुर के बृहदीश्वर मंदिर की स्थापत्य शैली से प्रेरि...