वाराणसी, दिसम्बर 6 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। काशी-तमिल संगमम् 4 के अंतर्गत तमिल शिक्षकों के दल का शुक्रवार को बीएचयू के कमच्छा स्थित शिक्षा संकाय में भव्य स्वागत हुआ। 'काशी और तमिलनाडु की आध्यात्मिक एवं दार्शनिक परंपराएं' विषयक शैक्षणिक सत्र में काशी और तमिल संस्कृतियों और शिक्षण परंपराओं पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो.राजेश्वर आचार्य ने काशी की आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपराओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अगस्त्य मुनि की उस कथा का उल्लेख किया, जब उन्होंने विन्ध्याचल पर्वत को कहा था कि वह उनके दक्षिण से लौटने तक झुका रहे। उन्होंने कहा कि काशी इसलिए शाश्वत है क्योंकि यहां आने वाला व्यक्ति अपना अहंकार त्याग देता है और उसके भीतर आध्यात्मिक सत्य प्रकट होने लगते हैं। दक्षिण भारत की अपनी यात्रा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वहां के मं...