वाराणसी, दिसम्बर 5 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी और तमिल परंपरा की बात आते ही सर्वप्रथम सदाशिव स्मरण में आते हैं। दक्षिण की पद्धति में शिव का नटराज स्वरूप अतिपूज्य है तो उत्तर में काशी की शैव-तंत्र साधना महत्वपूर्ण है किंतु यह संबंध मात्र शिव-भक्ति तक सीमित नहीं। दोनों सांस्कृतिक धाराओं के बीच धार्मिक और दार्शनिक समानताओं का आकाश भी अनंत है। इन समानताओं पर एक चर्चा की शुरुआत कलिकाल में काशी की अधिष्ठात्रि कही गईं मां अन्नपूर्णा से करते हैं। यहां मां अन्नपूर्णा और मां विंध्यवासिनी की पूजा लोकमानस में गहरे तक समाई है। वैसे ही तमिलनाडु में मीनाक्षी, अंडाल, काली अम्मन और मरियम्मन जैसी शक्तियां आस्था का केंद्र हैं। दोनों परंपराओं में शक्ति को 'जीवन-ऊर्जा' के रूप में देखा जाता है, जो शिव की पूरक हैं। मां गंगा काशी की जीवनरेखा हैं। तमिल परंप...