अलीगढ़, नवम्बर 26 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। शहर के लेकर देहात तक अस्पताल नहीं, खतरे के अड्डे खुल गए हैं। विभागीय मिलीभगत और पंजीकरण के नाम पर चल रहे खेल ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजाक बना दिया है। 50-100 गज की दुकानों को अस्पताल घोषित कर दिया गया है, संकरी गलियों में गंभीर सेवाएं दी जा रही हैं। और बेसमेंट, जो स्टोर या कबाड़ के लिए होता है, उसे ऑपरेशन थिएटर और वार्ड में बदला जा चुका है। सीलन, बदबू और अव्यवस्था के बीच मरीज भर्ती हैं। इलाज डॉक्टर के ज्यादा कंपाउंडर, नर्स और वार्ड ब्वाय करते हैं। विभागीय निरीक्षण में मिली कमियां फाइलों में दफन होकर रह गईं। अधिकांश निजी अस्पतालों की स्थिति किसी भी मानक पर खरी नहीं उतरती। हालात इतने बदतर हैं कि इन्हें अस्पताल कहना भी स्वास्थ्य व्यवस्था का अपमान है। हिंदुस्तान की टीम ने मंगलवार को कुछ अस्पतालों ...