मुजफ्फर नगर, नवम्बर 13 -- श्री श्यामाश्याम मंदिर में चल रही भागवत कथा में सातवें दिन कथा वाचक बृजवासी श्री कृष्ण ओर सुदामा की मित्रता प्रसंग का महत्व विस्तार से सुनाते हुए कहा कोई व्यक्ति किसी प्रकार से किसी के हिस्से की धन संपति या मामूली वस्तु भी स्वयं रखता है, उसको जीवन में भोगना पड़ता है। श्री महाराज ने बताया गुरु ईश्वर माता पिता के पश्चात मित्रता का रिश्ता ही महत्वपूर्ण है। सुदामा की पत्नी ने उनको मित्र श्री कृष्ण से मदद मांगने की बात कही। पहले तो सुदामा नहीं माने पत्नी जिद के आगे सुदामा को श्री कृष्ण के पास जाना पड़ा। जाते वक्त सुशीला ने पड़ोस से कुछ मुट्ठी चावल पोटली में बांध दे दिए। सेवकों ने महल में श्री कृष्ण को ये बताया हे महाराज कोई फटेहाल व्यक्ति फटी धोती के अलावा कोई वस्त्र तन पर नहीं है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। सुनते ही श्...