मुरादाबाद, दिसम्बर 24 -- नगर के मंदिर पोड़ीखेड़ा के विशाल प्रांगण में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को प्रभु श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कथा व्यास आचार्य नरेंन्दानद सरस्वती महाराज ने किया। बुधवार को कथा में कथा व्यास ने कहा कि श्री कृष्ण की बाल लीलाएं अत्यंत मनमोहक और दिव्य थीं, जिनमें उनकी नटखटता, सौंदर्य और अलौकिक शक्ति का अद्भुत मिश्रण था। वे गोकुल में ग्वाल-बालों के साथ माखन चुराते, गोपियों को तंग करते, बांसुरी बजाते और बकासुर जैसे राक्षसों का संहार कर धर्म की स्थापना करते थे, जिससे हर कोई उनके प्रेम और चंचलता में खो जाता था।गोकुल में उनका लालन-पालन हुआ था। यशोदा और नन्द उनके माता-पिता बने। अपने जन्म के कुछ समय बाद ही कंस की ओर से भेजी गई राक्षसी पूतना का वध किया, इसके बाद शकटासुर, तृणावर्त आदि राक्षसों का वध किया, ...
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