बुलंदशहर, फरवरी 10 -- क्षेत्र की विमला नगर कॉलोनी में आयोजित श्री मद्भागवत कथा में मंगलवार को कथा के चौथे दिन व्यास कृष्ण गोपाल शास्त्री ने बताया कि अयोध्या के रहने वाले राजा हरिशचंद्र ने धर्म के मार्ग पर चलकर धर्म को निभाया। उनकी पत्नी का नाम तारा और बेटे के नाम रोहिताश था। एक दिन गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र में अपने अपने शिष्यों को लेकर विवाद हो गया विश्वामित्र ने छल से भेष बदलकर हरिश्चंद्र से कुंजी और लगाम का संकल्प करवा लिया। 60 भार सोना दक्षिणा में मांगा। धर्म के बंधन में बंधे हरिश्चंद्र खुद बिक गए और अपने बेटा व पत्नी को भी बेच दिया। हरिश्चंद्र को कालू मेहतर ने खरीदा और रानी व बेटा को एक ब्राह्मण ने खरीदा। रोहिताश को जब सर्प ने डंस लिया तो शव का अंतिम संस्कार के लिए एक टका लिया। अंत में भगवान ने आकर रोहिताश को जीवित किया और हरिश्चंद्...