सराईकेला, नवम्बर 5 -- सरायकेला, संवाददाता। प्रखंड अंतर्गत जगन्नाथपुर के गोकुलधाम में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक बसंत प्रधान ने कहा कि जब इच्छाएं पूरी नहीं होती है, जब हम असफल हो जाते हैं तो मन अशांत हो जाता है। अशांत मन के साथ किए गए काम, पूजा पाठ का पूरा फल नहीं मिलता है। अशांति के बारे में राजा परीक्षित ने शुकदेव से पूछा था कि कलियुग में लोग इतने बेचैन क्यों रहेंगे। लोगों का मन शांत क्यों नहीं रहेगा। उन्होंने कहा शुकदेव जी ने परीक्षित से कहा कि पुराने समय में यह बात भूमि देवी ने भी भगवान से कही थी। देवी भूमि ने कहा था कि बड़े-बड़े राजा उन्हें जीतना चाहते हैं, जबकि वे खुद मौत के खिलौने हैं। कोई भी व्यक्ति मरने के बाद उन्हें अपने साथ नहीं ले जा सकता, फिर भी उसे पाने के लिए इतने बेचैन रहते हैं। शुकदेव जी ने परीक्षित को...
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