एटा, नवम्बर 18 -- खुले में शौच करने प्रति सोच बदलने के साथ गंदगी पर शत प्रतिशत लगाम लगाने के लिए केंद्र एवं प्रदेश सरकार जिलें में सैकड़ों करोड़ रुपया घरेलू एवं सामुदायिक शौचालयों के निर्माण पर खर्च चुकी है। बावजूद इसके ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश लोगों की सोच शौच के प्रति नहीं बदली है। घर में शौचालय होने के बाद भी आज भी 30-35 फीसदी लोग सुबह लोटा और बोतल लेकर खेत और मैदानों में शौच करने के लिए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए अधिकांश घरेलू शौचालय लकड़ी, उपले एवं भूसा आदि विभिन्न प्रकार की चीजें रखने में उपयोग किए जा रहे हैं। साथ ही अधिकांश अधूरे बने हैं। जिन घरों में शौचालय बन चुके हैं उनमें दरवाजे आदि नहीं है। कुछ घरों से तो शौचालयों का अस्तित्व ही नहीं बचा। जिन घरों में शौचालय बने हुए हैं उन घरों के अधिकांश बुजुर्ग एवं बच्चे खेतों...