रांची, दिसम्बर 3 -- रांची, विशेष संवाददाता। केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड (सीयूजे) में शोध प्रविधि पर पर आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम में बुधवार को के आईआईटी-आईएसएम धनबाद के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के प्राध्यापक प्रो अजीत कुमार बेहुरा ने- शोध के दार्शनिक प्रतिमान, पर विषय पर विस्तार से चर्चा की और समझाया कि पूर्व-प्रत्यक्षवाद, प्रत्यक्षवाद और उत्तर-प्रत्यक्षवाद, जैसे दृष्टिकोण शोध की दिशा, उसकी मान्यताओं और वैचारिक आधार को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। प्रतिमानों के बदलाव को स्पष्ट करते हुए उन्होंने लॉर्ड और गॉड के अर्थों में अंतर का उदाहरण देकर बताया कि संदर्भ बदलने पर शब्दों के मायने भी बदल जाते हैं। कहा कि लॉर्ड राजतंत्र में सर्वोच्च मानव शासक को दर्शाता है, जबकि गॉड सर्वोच्च दैविक और अधिभौतिक सत्ता का प्रतीक है। प्रो बेह...