कौशाम्बी, जनवरी 7 -- कोहरे की चादर में लिपटी तथागत की तपोभूमि बुधवार को भी भीषण सर्दी से ठिठुरती रही। सुबह लगभग नौ बजे तक घना कोहरा छाया रहा। इस दौरान दृश्यता शून्य के करीब रही। जनजीवन दिनभर अस्त-व्यस्त रहा। दोपहर में धूप तो निकली, लेकिन सर्द हवाएं शूल की तरह चुभ रहीं थीं। शाम होते-होते गलन और बढ़ गई। दोपहर होते-होते बादलों की ओट से सूरज ने झांकने की कोशिश की तो लुकाछिपी का खेल शुरू हो गया। कभी एक किरण फूटती तो मन में उम्मीद जगती कि अब धूप निकलेगी। लेकिन बादलों ने उम्मीद की किरण को फिर घेर लिया। दोपहर में धूप निकली, लेकिन खास राहत नहीं मिली। शाम होते ही कोहरा शुरू हो गया। मानो रात्रि शीघ्र उतर आई हो। कुल मिलाकर सर्द हवाएं हड्डियां कंपाती रहीं। लोगों ने गर्म कपड़ों के साथ अलाव का सहारा लिया, लेकिन सिहरन दूर नहीं हो रही थी। सड़कों पर सन्नाट...