चमोली, दिसम्बर 10 -- ज्योतिर्मठ नृसिंह मठांगन में भक्तों और ज्योतिषपीठ से जुड़े लोगों को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि आदि काल से ही चारों धामों के ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन पूजा स्थल स्थापित हैं, लेकिन लंबे समय से कुछ माध्यमों से यह प्रचारित हुआ है कि ग्रीष्मकालीन पूजायें पूरी होने पर व कपाट बंद होने के बाद पूजा यात्रा समाप्त हो जाती है, जबकि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि सदियों से ग्रीमष्मकालीन एवं शीतकालीन यात्रायें चलती आयी हैं। उन्होंने कहा कि शीतकाल में भक्त शीतकालीन गद्दी स्थलों में पहुंचकर अपने आराध्यों की पूजा करें इससे भी समान फल प्राप्त होता है। शीतकालीन यात्रा के तहत तीन शीतकालीन धामों के दर्शन व पूजा कर ज्योतिर्मठ पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने नृसिंह मंदिर में पूजा अर्चना कर अपनी शीतकालीन यात्रा का समा...