विकासनगर, अक्टूबर 31 -- श्रीराम सेवा मंडल सोसायटी द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को कथा व्यास ने भजन के साथ कथा की शुरुआत की। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कहा कि आत्मा का परमात्मा से मिलन ही शिव में लीन हो जाना है। भगवान शिव वैराग्य के देवता माने गए हैं, लेकिन शिव ने विवाह कर संसार को गृहस्थ आश्रम में रहकर भी वैराग्य व योग धर्म के अनुसरण का मार्ग बताया। कथा वाचक राजन महाराज ने कहा कि भगवान शिव के वाहन नंदी, माता पार्वती का वाहन शेर है, जबकि शिव के गले में सर्प रहते हैं। लिहाजा विपरीत विचारधारा के बीच आपसी समांजस्य रखने का संदेश शिव परिवार देता है। बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, उनकी तपस्या और श्रद्धा ने ही इस दिव्य मिलन...
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