सीवान, नवम्बर 18 -- बड़हरिया। प्रखंड के चाप कन्हौली गांव में आयोजित शतचंडी महायज्ञ में मंगलवार को शिव-पार्वती विवाह उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। विवाह प्रवचन सुनने और दिव्य झांकी का दर्शन करने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक लवकुश महाराज ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का विस्तृत और मनमोहक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हिमांचल की बेटी माता पार्वती का विवाह भोले बाबा से इसलिए निर्धारित हुआ, क्योंकि पिछले जन्म में वे सती के नाम से जानी जाती थीं। आत्मदाह करने से पहले सती ने हर जन्म में शिव जी को ही पति रूप में पाने की प्रार्थना की थी। उन्होंने कहा कि शिव जी गहन समाधि में लीन थे और किसी देवता को उनकी समाधि भंग करने का साहस नहीं था। अंततः कामदेव को यह जिम्मेदारी दी गई। पुष्प धनुष चलाकर तपस्या भंग ...