जमशेदपुर, दिसम्बर 26 -- सोनारी के कैलाश नगर स्थित गीता भवन में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन जमुना किनारे हरियाणा से आए आचार्य रविकांत वत्स ने भगवान राम-सीता स्वयंवर प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि स्वयंवर के दौरान भगवान राम द्वारा शिव धनुष भंग करने से परशुराम का अभिमान टूट गया और उन्हें मोक्ष का मार्ग प्राप्त हुआ। शिव धनुष टूटते ही परशुराम क्रोधित होकर राम-लक्ष्मण को साधारण मनुष्य समझ वध के लिए पहुंचे थे। अपने प्रताप का अभिमान रखने वाले परशुराम को भगवान राम ने साक्षात दर्शन देकर उनका उद्धार किया और शिव भक्ति का मार्ग दिखाया। इसके बाद राजा जनक ने विधि-विधान से भगवान राम-सीता का स्वयंवर संपन्न कराया। आचार्य रविकांत वत्स ने आगे कहा कि राजा दशरथ की इच्छा थी कि वे भगवान राम को राजपाठ सौंप दें, लेकिन द...