हरिद्वार, जुलाई 18 -- कांवड़ यात्रा में इस बार श्रद्धा के कई रंग देखने को मिल रहे हैं। कहीं कांवड़िए अपने वजन से भी भारी कांवड़ उठाकर गंगाजल लेकर चल रहे हैं तो कहीं कोई अपने माता-पिता को पालकी में बैठाकर गंगा मैया का आशीष दिला रहा है। किसी ने अपने पुत्र को ही भोलेनाथ का स्वरूप मानकर कंधे पर बैठा लिया है तो किसी ने मां को गंगा मां के साथ पालकी में विराजमान कर लिया है। यह दृश्य सिर्फ आस्था नहीं, परिवार और संस्कृति के प्रति समर्पण की मिसाल बन चुके हैं।
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