भदोही, फरवरी 6 -- सुरियावां, हिन्दुस्तान संवाद। क्षेत्र के मोढ़ बलिभद्रपुर गांव में चल रहे शिवपुराण की कथा का श्रवण कर शुक्रवार को आस्थावान कृतार्थ हो उठे। कथा वाचक प्रमोद शास्त्री जी ने श्रद्धालुओं को शिवपुराण कथा का श्रणव कराया। इस दौरान शास्त्री जी ने कहा कि कोई कर्म पाप या पुण्य का प्रतीक नहीं होता। बल्कि उस कर्म का उद्देश्य निश्चित करता है कि यह कार्य पुण्य कर्म है या पाप कर्म का। प्रजापति दक्ष का यज्ञ सत्कर्म न होकर पाप कर्म बनगया। क्योंकि वह यज्ञ भगवान शिव को नीचा दिखाने की भावना से किया जा रहा था। अत: यज्ञ वेदी पर ही सती जी ने प्राण त्याग कर दिया और यज्ञ का विध्वंश हो गया। इतना ही नहीं दक्ष का सिर भी काट लिया गया। उद्देश्य यदि पावन है तो साधारण कर्म भी पुण्य कार्य हो जाता है। यदि उद्देश्य अपावन है तो पावन कर्म भी पाप कर्म में परिवर...
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