वाराणसी, जून 7 -- पिंडरा, संवाद (वाराणसी)। शिक्षक विद्यार्थी के भविष्य निर्माता कहलाते हैं। पिंडरा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय चितईपुर के शिक्षक इससे भी एक कदम बढ़कर अपनी छात्रा के जीवनरक्षक बन गए। कक्षा-5 की 11 वर्षीय छात्रा को हाई डायबिटीज के कारण आंखों की रोशनी गंवानी पड़ी थी। शिक्षकों ने समय रहते छात्रा के लिए न सिर्फ धन जुटाया बल्कि इलाज की व्यवस्था भी की। बीएचयू में ऑपरेशन के बाद छात्रा की हालत में सुधार है। चितईपुर गांव की छात्रा शालू के पिता राहुल राम दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। मां शीला गृहिणी हैं। माता-पिता ने बताया कि शालू को बचपन से ही डायबिटीज है। बीमारी इस कदर गंभीर हो गई कि चिकित्सकों ने दिन में तीन बार उसे इंसुलिन के डोज लगाने को कहा। धन की कमी से अभिभावक सही उपचार नहीं करा सके और शालू की आंखों की रोशनी चली गई। इसकी जानकारी शि...
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