मुजफ्फरपुर, जनवरी 31 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। शास्त्री जी कविता को मूल मानते थे और कविता के रूप में आए बदलाव को कविता का सहज विकास। वे निराला की तरह जीवनपर्यंत गीत के समर्थक रहे और नवगीत नाम देकर उसे कविता से अलगाना उचित नहीं मानते थे। ये बातें शुक्रवार को आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री न्यास एवं रजा फाउंडेशन दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री जयंती समारोह में मुख्य वक्ता कवि राकेश रेणु ने कही। निराला निकेतन में अवस्थित आचार्य शास्त्रीजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शुक्रवार को कार्यक्रम की शुरुआत हुई। जयंती समारोह के प्रथम विचार सत्र में न्यास के सचिव प्रो. गोपेश्वर सिंह ने शास्त्रीजी के साहित्य की आवश्यकता एवं महत्व की ओर इशारा करते हुए साहित्य चर्चा करने के लिए अतिथियों का स्वागत किया। प्रख्यात कवि-च...
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