पटना, फरवरी 19 -- कोई भी उधारदाता या एजेंट किसी भी प्रकार की पीड़ा पहुंचा कर वसूली में संलग्न होता है या सुविधा प्रदान करता है या प्रयास करता है तो उसे तीन से पांच साल तक की सजा होगी। पांच लाख रुपये तक तक जुर्माना भी लगाया जाएगा। राज्य सरकार की ओर से तैयार किये गए बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं (धन उधार विनियमन एवं प्रपीड़क कार्रवाई निवारण) विधेयक, 2026 में इसका प्रावधान किया गया है। यह विधेयक राज्य में कार्यरत सूक्ष्म वित्त संस्थाओं और छोटे लोन देने वालों को विनियमित (रेगुलेट) करने के लिए तैयार किया गया है। गुरुवार को विधानसभा में विधेयक की प्रति वितरित की गई। इसके मुताबिक डिजिटल रूप से पीड़ा पहुंचाने, पहचान का दुरुपयोग, अवैध निगरानी या प्रतिरूपण के माध्यम से धमकी, आवश्यक दस्तावेजों की जब्ती, परिवार और बच्चों पर दबाव के लिए भी पांच साल तक ...