पटना।, दिसम्बर 20 -- निमिषा (काल्पनिक नाम) के घर इन दिनों खुशियों का ऐसा उजाला है, जिसकी कल्पना उन्होंने शायद खुद भी छोड़ दी थी। दरवाजे पर बधाइयां देनेवालों की कतार है, गोद में नन्हा सा बेटा और आंखों में आंसुओं के साथ मुस्कान। कल तक जिन लोगों के सवाल और ताने दिल को छलनी कर देते थे, आज वही लोग बेटे को आशीर्वाद देते नहीं थक रहे हैं। निमिषा और राजेश (काल्पनिक नाम) की शादी को पूरे 28 साल हो चुके थे। साल दर साल बीतते गए, लेकिन संतान का सपना अधूरा ही रहा। समाज के दबाव, रिश्तेदारों की फुसफुसाहट और भीतर ही भीतर टूटती उम्मीद-यह सब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका था। एक समय ऐसा भी आया, जब दोनों ने मान लिया कि शायद अब माता-पिता बनना उनकी किस्मत में नहीं है। थके-हारे और टूटी उम्मीदों के साथ वे दरभंगा स्थित स्मृति आईवीएफ एंड फर्टिलिटी सेंटर पहुंचे। यहीं...
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