नई दिल्ली, मई 28 -- पद्मा नदी की लहरें शायद उस दिन की गवाही अब भी देती होंगी, जब लांस नायक प्रेम सिंह देश की रक्षा करते हुए उसमें समा गए थे। लेकिन उनकी शहादत को देश ने मान्यता देने में तीन दशक लगा दिए। 30 साल के लंबे इंताजर के बाद आखिकार बीएसएफ ने लांस नायक सिंह को शहीद मान लिया। अगस्त 1994 में बांग्लादेशी तस्करों का पीछा करते हुए लापता हुए प्रेम सिंह को यह सम्मान दिलाने के लिए उनकी पत्नी गुड्डी देवी और भाई धनसिंह ने 30 साल तक ऐसी लड़ाई लड़ी, जिसमें न वर्दी थी और न ही हथियार। सिर्फ हौसला और उम्मीद थी। आखिरकार सीमा सुरक्षा बल ने प्रेम सिंह को शहीद का दर्जा देने की घोषणा की, तो परिवार की आंखें छलक उठीं। प्रेम 23 अगस्त 1994 को बंगाल के जंगलों में तस्करों का पीछा करते समय पद्मा नदी में डूब जाते हैं। लंबे सर्च ऑपरेशन के बाद भी वे नहीं मिले। ती...
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