मुंगेर, जुलाई 5 -- जमालपुर। इम्तेयाज आलम इस्लामी हिजरी के पहले महीने मुहर्रम को नवमीं व दसवी के रोज मुहर्रम शहादत की याद दिलाता है। मुहर्रम घटना का संबंध इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद साहेब के नाती हजरत इमाम हसन एवं हुसैन के बलिदान से है। क्रुर शासक यजिद के खिलाफत को लेकर धर्म के मार्ग पर चलने वाले हजरत इमाम हुसैन ने नवमीं से ही अपनी शहादत दी थी। इन दोनों के बीच करबला के मैदान में दस दिनों तक जंग होता रहा। आखिकार हजरत हुसैन शहीद हो गये। मगर अधर्मी के खिलाफत को स्वीकार नहीं किया। इसके पूर्व साजिश रचकर यजीद की अनुयायियों ने हसन को धोखे से जहर दे दिया था। यह इस्लाम के इतिहास में सबसे बड़ी खूनी शहादत है। वैसे इस्लाम धर्म में सिया व सुन्नी के समुदाय द्वारा मुहर्रम मनाया जाने का रिवाज रहा है। हजरत इमाम हुसैन ने अपने संपूर्ण जीवन में धर्...
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