समस्तीपुर, जून 24 -- हर सुबह समस्तीपुर की सड़कों पर सूरज से पहले शोर उतर आता है-प्रेशर हॉर्न की चीख, धुएं की मोटी परत और धूल का अंधड़। मगरदही घाट से मुक्तापुर गुमटी तक सांस लेना तकलीफ बन गया है। बच्चे खांसी में उलझे हैं, बुजुर्गों की सुनने की शक्ति जाती रही और घर साउंडप्रूफ खिड़कियों में कैद हो गए हैं। हर कोने में एक अजीब-सी थकान है-जिसे न कोई सुन रहा, न समझ रहा। शिकायतें थक चुकी हैं, लोग हार मानने को मजबूर हैं। क्या कोई सुनेगा इन सड़कों की घुटती आवाज़ें? या फिर समस्तीपुर की ये हवा हमेशा जहर बनी रहेगी? यह बातें हन्दिुस्तान के 'बोले समस्तीपुर' संवाद के दौरान उभर कर सामने आईं। समस्तीपुर की सड़कों पर अब सिर्फ गाड़ियां नहीं दौड़तीं है, बल्कि दौड़ती है एक ऐसी व्यवस्था जो लोगों की सांसों को धीरे-धीरे निगल रही है। मुसरीघरारी चौराहा, मगरदही घाट, ...
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